Thursday, May 21, 2020

मेरी खामोशी

खामोशी गुनगुनाती है, मुस्कराती है,
दुःख में संग आँसू भी बहाती है,
यादों की गलियों में विचरती हूँ,
मन के भावों को शब्दों में संजोती हूँ,
न बातें बनने-बिगड़ने का डर,
न अकेलेपन से उपजे अवसाद का ख़ौफ़,
शोर से दूर सुकून के पल बिताती हूँ,
भूल चुकी थी ,स्वयं को तलाशती हूँ,
मेरे साथ मेरी खामोशी खिलखिलाती है।
मेरी खामोशी गुनगुनाती है, मुस्कराती है।।
                     मेरी खामोशी।।

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