न्याय,
कभी घुटने टेक देता है धन के समक्ष,
कभी दबा दिया जाता है बाहुबली द्वारा,
कभी छिप जाता है झूठ के धुंध में,
कभी जकड़ जाता है कुटिल शब्द जाल में,
गरीब की पहुंच से सर्वदा सुदूर,
कभी सबूतों के अभाव में मजबूर,
न्याय की देवी खड़ी है कटघरे में,
आँखों में आँसू भरे,पट्टी बांधकर।।
कभी घुटने टेक देता है धन के समक्ष,
कभी दबा दिया जाता है बाहुबली द्वारा,
कभी छिप जाता है झूठ के धुंध में,
कभी जकड़ जाता है कुटिल शब्द जाल में,
गरीब की पहुंच से सर्वदा सुदूर,
कभी सबूतों के अभाव में मजबूर,
न्याय की देवी खड़ी है कटघरे में,
आँखों में आँसू भरे,पट्टी बांधकर।।
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