आज रवि का सुबह ही फोन आ गया था।वैसे तो लता जी नियम से हर शनिवार को बेटे को स्वयं फोन कर लेती थीं, बेटियों से तो लगभग रोज ही बात हो जाती थी।तबियत वगैरह पूछने के बाद रवि फोन रखते समय जब कहता कि मम्मी अपना ख्याल रखिएगा तो उसके शब्दों में छिपी पीड़ा और आर्द्रता वे बखूबी महसूस करती थीं, हंसकर कहतीं चिंता मत करो मैं बिल्कुल ठीक हूं, तुम भी अपना ध्यान रखना।
यही रवि था, जब एक लड़की के पिता ने पूछ लिया था कि आपने अभी मकान नहीं बनवाया है तो रिटायरमेंट के बाद कहां रहेंगे तो नाराज होकर बोला था कि ये कोई पूछने की बात है, अपने बेटे के साथ रहेंगे और कहीं क्यों रहेंगे।
रवि ने अपने लिए लड़की पसन्द करने की जिम्मेदारी मां को ही सौंप दिया था।लता जी ने पढ़ी लिखी एवं अच्छे परिवार की दीप्ति से बिना लेन देन के रवि का विवाह किया।समय बीतता रहा।कभी कभी रवि की बातों से लगता कि दीप्ति ससुराल पक्ष से सम्बंध नहीं रखना चाहती, परन्तु वे रवि को और खुद को भी समझा देतीं।
यही रवि था, जब एक लड़की के पिता ने पूछ लिया था कि आपने अभी मकान नहीं बनवाया है तो रिटायरमेंट के बाद कहां रहेंगे तो नाराज होकर बोला था कि ये कोई पूछने की बात है, अपने बेटे के साथ रहेंगे और कहीं क्यों रहेंगे।
रवि ने अपने लिए लड़की पसन्द करने की जिम्मेदारी मां को ही सौंप दिया था।लता जी ने पढ़ी लिखी एवं अच्छे परिवार की दीप्ति से बिना लेन देन के रवि का विवाह किया।समय बीतता रहा।कभी कभी रवि की बातों से लगता कि दीप्ति ससुराल पक्ष से सम्बंध नहीं रखना चाहती, परन्तु वे रवि को और खुद को भी समझा देतीं।
रिटायरमेंट के बाद रवि के पिता जी ने बड़े शौक से मकान बनवाया परन्तु मात्र दो वर्ष बाद ही स्वर्ग सिधार गए।बेटे ने साथ चलने की जिद की परन्तु वे जाने को तैयार नहीं हुईं।डेढ़ साल बाद एक बार उनकी तबियत काफी खराब हो गई तब रवि अपने साथ ले गया।तभी चार पांच माह वे रहीं बेटे बहू के पास।आज भी उन दिनों की कड़वी यादें उनकी आंखों में आंसू ले आते हैं।
रवि तो सुबह ऑफिस चला जाता, शाम7-8 बजे तक वापस आता।पूरे दिन में एक बार भी दीप्ति उन्हें देखने नहीं आती।खाना बनाने वाली खाना बना कर रख जाती, वे जैसे तैसे उठकर खाना ले लेतीं।वे शुगर की मरीज़ हैं, उन्हें बीच बीच में कुछ फल इत्यादि चाहिए होता था।दीप्ति को उनका किचन में जाना भी बर्दाश्त नहीं था।रवि जब पूछता कि फल दूध मम्मी को नियमित देती रहना तो हां कर देती, फिर उसके जाने के बाद मायके फोन कर उन्हें सुनाती कि उन्हें हर समय कुछ कहने खाने को चाहिए। बच्चों को भी उनके पास नहीं आने देती।अक्सर उनका शुगर लो हो जाता।रवि परेशान हो गया कि यहां आने के बाद मां इतनी कमजोर क्यों होती जा रही है।वे शिकायत कर बेटे की गृहस्थी में परेशानी नहीं पैदा करना चाहती थीं।
उन्हें अपमानित करने का मौका निकालती रहती थी।एकबार मायके वाले आए हुए थे, कई पकवान बनवाए थे,परन्तु उन्हें बीमारी के नाम पर सुखी रोटी सब्जी दे दिया।एक बार तो हद ही हो गई।छोटे बच्चे ने कमरे में पानी गिरा दिया, उन्होंने पोछने को कहा तो अनसुना कर दिया।फिर वे पोंछा लाने के लिए जाने लगीं तो फ़िसल कर गिर गईं, वे वहीं बेहोश हो गईं।दोपहर में जब काम वाली लड़की आई तो उसने उन्हें सहारा देकर बिस्तर पर लिटाया।खैर जैसे तैसे ठीक होते ही उन्होंने वापस लौटने का फैसला कर लिया।और फिर हाथ पैर चलने तक अपने घर पर ही रहने का ठान लिया।साल दो साल में रवि अकेले आकर मिल जाता।पिछली बार आया था जाड़ों में अचानक तो वे आश्चर्य चकित रह गईं।एक दिन काफी अपसेट था तो पूछने पर फूट पड़ा कि आप क्या सोचती हैं कि आप नहीं बताती हैं तो मुझे दीप्ति के व्यवहार का पता नहीं है।मैं कितना दुर्भाग्यशाली हूं कि अपने माँ की सेवा नहीं कर सकता।लताजी स्वयं को अपराधी मानती हैं कि वे सही चुनाव नहीं कर सकीं।
जिंदगी की कहानियां अजीब हैं, कहीं बहू, कहीं सास,नन्द,कहीं बेटा बेटी, पति पत्नी हर रिश्ते में कुछ न कुछ परेशानियां आती ही रहती हैं।ऐसा क्यों होता है।
रवि तो सुबह ऑफिस चला जाता, शाम7-8 बजे तक वापस आता।पूरे दिन में एक बार भी दीप्ति उन्हें देखने नहीं आती।खाना बनाने वाली खाना बना कर रख जाती, वे जैसे तैसे उठकर खाना ले लेतीं।वे शुगर की मरीज़ हैं, उन्हें बीच बीच में कुछ फल इत्यादि चाहिए होता था।दीप्ति को उनका किचन में जाना भी बर्दाश्त नहीं था।रवि जब पूछता कि फल दूध मम्मी को नियमित देती रहना तो हां कर देती, फिर उसके जाने के बाद मायके फोन कर उन्हें सुनाती कि उन्हें हर समय कुछ कहने खाने को चाहिए। बच्चों को भी उनके पास नहीं आने देती।अक्सर उनका शुगर लो हो जाता।रवि परेशान हो गया कि यहां आने के बाद मां इतनी कमजोर क्यों होती जा रही है।वे शिकायत कर बेटे की गृहस्थी में परेशानी नहीं पैदा करना चाहती थीं।
उन्हें अपमानित करने का मौका निकालती रहती थी।एकबार मायके वाले आए हुए थे, कई पकवान बनवाए थे,परन्तु उन्हें बीमारी के नाम पर सुखी रोटी सब्जी दे दिया।एक बार तो हद ही हो गई।छोटे बच्चे ने कमरे में पानी गिरा दिया, उन्होंने पोछने को कहा तो अनसुना कर दिया।फिर वे पोंछा लाने के लिए जाने लगीं तो फ़िसल कर गिर गईं, वे वहीं बेहोश हो गईं।दोपहर में जब काम वाली लड़की आई तो उसने उन्हें सहारा देकर बिस्तर पर लिटाया।खैर जैसे तैसे ठीक होते ही उन्होंने वापस लौटने का फैसला कर लिया।और फिर हाथ पैर चलने तक अपने घर पर ही रहने का ठान लिया।साल दो साल में रवि अकेले आकर मिल जाता।पिछली बार आया था जाड़ों में अचानक तो वे आश्चर्य चकित रह गईं।एक दिन काफी अपसेट था तो पूछने पर फूट पड़ा कि आप क्या सोचती हैं कि आप नहीं बताती हैं तो मुझे दीप्ति के व्यवहार का पता नहीं है।मैं कितना दुर्भाग्यशाली हूं कि अपने माँ की सेवा नहीं कर सकता।लताजी स्वयं को अपराधी मानती हैं कि वे सही चुनाव नहीं कर सकीं।
जिंदगी की कहानियां अजीब हैं, कहीं बहू, कहीं सास,नन्द,कहीं बेटा बेटी, पति पत्नी हर रिश्ते में कुछ न कुछ परेशानियां आती ही रहती हैं।ऐसा क्यों होता है।
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