Thursday, May 28, 2020

सौदा किस्मत का


दीप एवं अनीता का अरेंज मैरिज हुआ था।दीप के माता-पिता अपनी पसंद से अनीता को बहू बनाकर लाए थे, उसे अपने माँ पिता के पसंद पर पूर्ण विश्वास था।दीप भी अनीता के सौंदर्य एवं प्रेमपूर्ण व्यवहार से मन्त्र मुग्ध हो गया था।।वह अपने माँ पिता की इकलौती सन्तान था, उसे चिंता रहती थी कि कहीं उसकी पत्नी का सामंजस्य उसके माता पिता से न बैठ सका तो क्या होगा।लेकिन अनिता ने अपने मधुर व्यवहार से उनके हृदय में बेटी की जगह बना लिया।दीप अपने पिताजी के व्यवसाय को और अधिक उन्नति के पथ पर ले गया।ईश्वर की कृपा से घर में हर तरह से सुख-समृद्धि-शान्ति थी।
   पर समय सदैव एक समान नहीं रहता।दो वर्ष तो पंख लगाकर उड़ गए।अब सभी एक नन्हे मेहमान की प्रतीक्षा करने लगे थे।विलम्ब होते देख चिकित्सा के लिए डॉक्टर के पास जाने पर तमाम तरह की जांच होने पर पता चला कि अनीता के गर्भाशय में एक छोटा सा ट्यूमर है ट्यूमर कैंसरस नहीं था इसलिए चिंता की बात नहीं थी।दवाइयां प्रारंभ हो गईं।दीप ने अपने माता पिता से इस बात का ज़िक्र नहीं किया।इलाज चलते चलते डेढ़ वर्ष और बीत गए।अब दोनों के मन में निराशा घर करने लगी थी, ट्यूमर न घट रहा था, न बढ़ रहा था।इसी बीच अनीता प्रेग्नेंट हो गई डॉक्टर ने कहा कि यदि ट्यूमर का आकार न बढ़े तब तो कोई बात नहीं।नियमित चेकअप चलता रहा।
   लेकिन किस्मत के तो खेल ही निराले हैं, सब कुछ अच्छा चलते चलते ऐसी ठोकर दे देता है कि सम्भलना मुश्किल हो जाता है।बच्चे के साथ साथ चौथे माह से ट्यूमर का आकार भी बढ़ने लगा,कंचे के आकार से बढ़कर बेर के बराबर हो गया।हालांकि बच्चे का विकास सामान्य था।पांचवां महीना बीतते बीतते ट्यूमर सेब के बराबर हो गया।अब डॉ ने चिंता जताते हुए कहा कि ट्यूमर पर बढ़ते बच्चे का दबाव पड़ने से ट्यूमर के साइड वाली दीवार पतली हो गई है, अतः प्रेग्नेंसी आगे जारी रखना खतरनाक हो सकता है।
   अचानक उनकी खुशियां उनसे दूर जाती प्रतीत होने लगीं।अनीता किसी भी हालत में अपने बच्चे को खोना नहीं चाहती थी।दुखी तो दीप भी बहुत था परंतु अजन्मे बच्चे के मोह में वह अनीता को दावँ पर लगाने को हर्गिज तैयार नहीं था।दोनों को तनाव में देखकर मां पिता भी परेशान थे, परन्तु बार बार पूछने पर भी दीप-अनीता ने उन्हें कुछ नहीं बताया क्योंकि वे उन्हें दुःखी नहीं करना चाहते थे।देखते देखते छठा माह बीतने को आया।स्थिति की गम्भीरता को देखते हुए अब हर सप्ताह चेकअप होने लगा था।एक दिन अचानक अनीता के पेट में दर्द प्रारंभ हो गया।आनन फानन में अस्पताल ले जाया गया।चेकअप होने पर पता चला कि ट्यूमर वाली दीवार अत्यधिक पतली हो चुकी है एवं कभी भी फट सकती है।अब डॉ ने स्पष्ट कह दिया कि यदि अनीता की जान बचानी है तो तुरंत ऑपरेशन कर के बच्चे को निकालना होगा।अब दीप के माता पिता को भी सारी बात पता चली, वे दीप पर नाराज होने लगे कि उन्हें पहले सारी बात क्यों नहीं बताया गया।उन्होंने दृढ़ता से कहा कि उनके लिए अनीता की जिंदगी ज्यादा महत्वपूर्ण है, यह निर्णय लेने में इतना विलम्ब होना ही नहीं चाहिए था।
   खैर, ऑपरेशन कर बच्चे को इनक्यूबेटर में रखकर बचाने का प्रयास किया गया, परन्तु उसे बचाया नहीं जा सका।सभी बेहद दुखी थे, किन्तु किस्मत के आगे किसका वश चलता है।दीप ने किस्मत से सौदा कर अनिता को चुन लिया बच्चे के बदले में।
   अनीता को उस सदमें से उबरने में सबने हर सम्भव प्रयास किया।अनीता के पास असीम प्यार करने वाला परिवार था, पर गोद सूनी ही रह गई।
   अजीब है भाग्य का चलन,बहुत कुछ देकर भी एक ऐसी रिक्ति छोड़ देता है, जिसकी भरपाई किसी भी तरह नहीं हो पाती।


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