Friday, July 3, 2020

सुखान्त


वैसे तो कुछ न कुछ अनहोनी होती ही रहती है, परन्तु 2020 में विश्वव्यापी कोरोना महा आपदा ने जो त्राहि त्राहि मचाया, उसने जीवन की रूप रेखा ही बदल दी।कटु सत्य तो यही है कि आगे क्या होगा कल्पना से परे है, परन्तु आशा पर दुनिया टिकी है, इसलिए मैं उम्मीद की एक कहानी लिखना चाहती हूं।
    मेरा बेटा दिल्ली में एक बड़े हॉस्पिटल में दो वर्ष से चिकित्सक है।अपने साथ कार्यरत डॉ लड़की से उसका परिचय कुछ समय में प्रेम में परिवर्तित हो गया।मिलने पर हमें भी वह कन्या अपने बेटे के लिए पूर्ण रूप से उपयुक्त प्रतीत हुई।दोनों पक्षों में वर्तालाप के उपरांत 25 मई को विवाह करने का निर्णय लिया गया।दोनों पक्षों में प्रथम समारोह था, इसलिए हम सब उत्साह से तैयारी में जुट गए।अभी तैयारी प्रथम चरण में ही थी कि कोरोना आपदा के आ जाने से लॉक डाउन प्रारम्भ हो गया।जीवन रक्षा में खाकी एवं श्वेत वर्दी के लोग प्राण प्रण से जुट गए।मेरे बेटे के हॉस्पिटल में भी कोरोना चिकित्सा की व्यवस्था थी।चिकित्सा करते करते मेरा बेटा भी कोरोना पॉजिटिव हो गया।लेकिन सकारात्मक सोच एवं समुचित चिकित्सा से जल्दी ही ठीक होकर पुनः अपने कार्य में जुट गया।
हमारे सलाह से विवाह की बजाय 25 मई को सहयोगियों के समक्ष उन्होंने सगाई कर ली।इस कठिन दौर में एक छोटी सी खुशी भी एक नए ऊर्जा का संचार कर देती है जीवन में।अगस्त बीत गया है, वेक्सीन का ट्रायल मरीजों पर प्रारंभ किया जा चुका है, परिणाम अपेक्षित प्राप्त हो रहे हैं।लॉक डाउन तमाम सावधानियों के साथ खुल चुका है।प्रयाप्त सुरक्षा उपायों के साथ ट्रेन, बस,वायु सेवा प्रारंभ हो गई है।लोग सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क का उपयोग, सफाई,इत्यादि समस्त सुरक्षा उपायों को जीवन पद्धति में शामिल कर चुके हैं।दिवाली आने वाली है, उसके साथ साथ एक बड़ी खुशखबरी आई है कि भारत में कोरोना की वेक्सीन पूर्णतया सफल रही है।काफी लोगों में तो स्वयं ही इम्यूनिटी डेवलप हो चुकी है, जल्दी ही सभी को वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगा।
  दिसम्बर के अंतिम सप्ताह में सादगी से हमारे बेटे का विवाह संपन्न हो गया।इतने कठिन परिस्थितियों से गुजर कर हम बाहर आए हैं।दोनों परिवार मिलकर एक साथ वैष्णो देवी मां के दर्शन को जा रहे हैं,2020 को विदा करते हुए नए आशाओं के साथ नव वर्ष का स्वागत करने।नव युगल वहीं से दूसरी जगह चले जाएंगे और हम वापस अपने घरों को।

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