मैं नहीं जानती कि पुनर्जन्म होता है या नहीं।पता नहीं हमारे पिछले जन्म के कर्म हमारे इस जन्म को कितना प्रभावित करते हैं या इस जन्म के कर्मों का क्या प्रतिफल होगा।कहते हैं कि मृत्यु के समय जो मनःस्थिति होती है या जो प्रबल इच्छा उस वक्त मन में होती है उसी के अनुसार अगला जन्म मिलता है।खैर, जिस बात की जानकारी नहीं उसके बारे में क्या विश्लेषण करना।
मैं फिलहाल जिस घटना का ज़िक्र कर रही हूं, वह मात्र मेरा अनुभव एवं विश्वास है।
6 जुलाई की वह मनहूस रात्रि।लगभग 10 बजे रात में मेरे मोबाइल पर अनजान नम्बर से फोन आता है।दूसरी बार रिंग करने पर मैं हमेशा कॉल ले लेती हूं।फोन करने वाले ने पूछा कि आप प्रशांत नायक की दीदी बोल रही हैं क्या?पता नहीं क्यों किसी अनहोनी की आशंका से दिल घबरा उठा।मैंने कांपती आवाज में पूछा कि आप कौन एवं कहाँ से बोल रहे हैं?
जबाब मिला कि मैं उसका दोस्त मेरठ से बोल रहा हूँ, प्रशांत का एक्सीडेंट हो गया है।मैंने घबरा कर पूछा कि वह कैसा है।जबाब मिला कि उसकी हालत गंभीर है आप तुरंत आ जाइए।
मेरे पति ने मुझसे फोन लेकर उससे विस्तृत जानकारी ली।जैसे तैसे हमने थोड़े पैसे एकत्रित किए,हमारे मकान मालिक के बेटे ने तुरंत अपनी कार निकाल ली,और आधे घंटे में हम निकल पड़े।अभी चौराहे तक ही पहुंचे थे कि उसकी मौत की भयानक खबर ने हमें दुःख के सागर में डूबा दिया।25 वर्ष की अल्पायु में वह हमसे दूर हो गया।प्रशांत मेरा दूसरा छोटा भाई था।अपने सात साल के बेटे को उसके चाचा जी के पास छोड़कर हम मेरठ के लिए निकल पड़े।रास्ते में मेरे पति ने मेरे बड़े भाई को जो मेरे बाद का है,तीनों बहनों एवं कुछ रिश्तेदरों को फोन किया।मम्मी पापा को केवल दुर्घटना की खबर दी।तीसरे नंबर की बहन जो प्रशांत के साथ ट्विन्स थी, बंगलौर में थी,वह भी दोपहर तक मेरठ आ गई अपने पति के साथ, जिसका विवाह अभी 6 माह पूर्व ही हुआ था।तमाम औपचारिकताओं को मेरे पति ने प्रशांत के मित्रों की सहायता से पूर्ण किया।हम दोनों बहनें तो बदहवास थीं।तीसरे दिन हम गोरखपुर पहुंचे।रिश्तेदारों के पहुंच जाने के कारण सुबह तक मां पिता को भी पता चल चुका था, वे तो संज्ञाशून्य हो चुके थे।होनी के समक्ष मानव विवश होता है।क्रिया कर्म की समस्त औपचारिकताएं पूरी होने के पश्चात सभी लोग चले गए।तेरहवीं के बाद मम्मी पापा को बिलखते छोड़कर टूटे हृदय के साथ हम भाई बहनों को भी अपने अपने कार्य स्थल को लौटना पड़ा।
जीवन अपनी गति से प्रवाहमान था।हम मां-बहनें अक्सर प्रशांत को स्वप्न में देखा करते थे।मैं जब भी सपने में देखती, यही देखती कि उसकी मृत्यु हो चुकी है और उसकी आत्मा हमसे मिलने आई है।हम सब उससे अटैच्ड भी अत्यधिक थे।उसके मित्रों ने बताया था कि वह आखरी समय में भी होश में था एवं डॉक्टरों से विनती कर रहा था कि मुझे बचा लीजिए डॉक्टर, मुझपर बहुत जिम्मेदारी है।
पता नहीं सच क्या है, लेकिन कहते हैं कि मृत्यु के समय जैसी प्रबल भावना होती है, यदि सम्भावना होती है तो आत्मा उसी घर में पुनर्जन्म लेती है।
मेरे सपनों का मेरा अपना विश्लेषण है जो मैंने अपने अनुभवों से निकाला है।मैं जब भी स्वप्न में अपना विवाह देखती हूँ तो मुझे जल्दी ही कहीं से विवाह का शुभ समाचार प्राप्त होता है।यदि सपने में अपनी डिलीवरी ,प्रेग्नेंसी देखती हूं तो बच्चों की खुशखबरी सुनती हूं, चाहे परिचितों से या रिश्तेदारों से।
समय अपनी गति से चलता रहा।नवम्बर के प्रथम सप्ताह की एक रात मैंने सपने में पुनः प्रशांत को देखा, मैंने उससे कहा कि तुम भटक क्यों रहे हो, प्रीति के यहां(उसकी जुड़वां) पैदा क्यों नहीं हो जाते।सुबह मैंने पति से जिक्र भी किया।उन्होंने कहा कि तुम सभी अभी सदमें में हो इसलिए ऐसे सपने देखते रहते हो।एक दो दिनों में मां-बहनों से बात करने पर पता चला कि उस रात्रि सभी ने सपने में उसे देखा था।20-25 दिन बाद मैंने फिर सपना देखा कि मेरे बेटा हुआ है।सुबह उठते ही मैंने पति को यह बात बताई।अभी आधे घंटे ही बीते थे कि प्रीति का फोन आया, मैंने हैलो बोलते ही कहा कि खुशखबरी सुना रही हो न,वह चौक पड़ी कि आपको कैसे पता।मैंने उसे सपने वाली बात बताई।उसने कहा कि आप सही कह रही हैं, मैंने अभी प्रेग्नेंसी टेस्ट किया है, पॉजिटिव रिपोर्ट आई है।खैर, दुःख से निकलने के लिए खुशी की एक किरण भी काफी होती है।
यथा समय उसे पुत्र की प्राप्ति हुई।हम सब उसे प्रशांत का पुनर्जन्म ही मानते हैं।प्रीति एवं छोटी बहन तो बाकायदा उसे राखी भी बांधती हैं।हालांकि मेरा मानना है कि वर्तमान के रिश्ते को ही देखना चाहिए।सब विश्वास की बातें हैं अपनी अपनी।
मैं फिलहाल जिस घटना का ज़िक्र कर रही हूं, वह मात्र मेरा अनुभव एवं विश्वास है।
6 जुलाई की वह मनहूस रात्रि।लगभग 10 बजे रात में मेरे मोबाइल पर अनजान नम्बर से फोन आता है।दूसरी बार रिंग करने पर मैं हमेशा कॉल ले लेती हूं।फोन करने वाले ने पूछा कि आप प्रशांत नायक की दीदी बोल रही हैं क्या?पता नहीं क्यों किसी अनहोनी की आशंका से दिल घबरा उठा।मैंने कांपती आवाज में पूछा कि आप कौन एवं कहाँ से बोल रहे हैं?
जबाब मिला कि मैं उसका दोस्त मेरठ से बोल रहा हूँ, प्रशांत का एक्सीडेंट हो गया है।मैंने घबरा कर पूछा कि वह कैसा है।जबाब मिला कि उसकी हालत गंभीर है आप तुरंत आ जाइए।
मेरे पति ने मुझसे फोन लेकर उससे विस्तृत जानकारी ली।जैसे तैसे हमने थोड़े पैसे एकत्रित किए,हमारे मकान मालिक के बेटे ने तुरंत अपनी कार निकाल ली,और आधे घंटे में हम निकल पड़े।अभी चौराहे तक ही पहुंचे थे कि उसकी मौत की भयानक खबर ने हमें दुःख के सागर में डूबा दिया।25 वर्ष की अल्पायु में वह हमसे दूर हो गया।प्रशांत मेरा दूसरा छोटा भाई था।अपने सात साल के बेटे को उसके चाचा जी के पास छोड़कर हम मेरठ के लिए निकल पड़े।रास्ते में मेरे पति ने मेरे बड़े भाई को जो मेरे बाद का है,तीनों बहनों एवं कुछ रिश्तेदरों को फोन किया।मम्मी पापा को केवल दुर्घटना की खबर दी।तीसरे नंबर की बहन जो प्रशांत के साथ ट्विन्स थी, बंगलौर में थी,वह भी दोपहर तक मेरठ आ गई अपने पति के साथ, जिसका विवाह अभी 6 माह पूर्व ही हुआ था।तमाम औपचारिकताओं को मेरे पति ने प्रशांत के मित्रों की सहायता से पूर्ण किया।हम दोनों बहनें तो बदहवास थीं।तीसरे दिन हम गोरखपुर पहुंचे।रिश्तेदारों के पहुंच जाने के कारण सुबह तक मां पिता को भी पता चल चुका था, वे तो संज्ञाशून्य हो चुके थे।होनी के समक्ष मानव विवश होता है।क्रिया कर्म की समस्त औपचारिकताएं पूरी होने के पश्चात सभी लोग चले गए।तेरहवीं के बाद मम्मी पापा को बिलखते छोड़कर टूटे हृदय के साथ हम भाई बहनों को भी अपने अपने कार्य स्थल को लौटना पड़ा।
जीवन अपनी गति से प्रवाहमान था।हम मां-बहनें अक्सर प्रशांत को स्वप्न में देखा करते थे।मैं जब भी सपने में देखती, यही देखती कि उसकी मृत्यु हो चुकी है और उसकी आत्मा हमसे मिलने आई है।हम सब उससे अटैच्ड भी अत्यधिक थे।उसके मित्रों ने बताया था कि वह आखरी समय में भी होश में था एवं डॉक्टरों से विनती कर रहा था कि मुझे बचा लीजिए डॉक्टर, मुझपर बहुत जिम्मेदारी है।
पता नहीं सच क्या है, लेकिन कहते हैं कि मृत्यु के समय जैसी प्रबल भावना होती है, यदि सम्भावना होती है तो आत्मा उसी घर में पुनर्जन्म लेती है।
मेरे सपनों का मेरा अपना विश्लेषण है जो मैंने अपने अनुभवों से निकाला है।मैं जब भी स्वप्न में अपना विवाह देखती हूँ तो मुझे जल्दी ही कहीं से विवाह का शुभ समाचार प्राप्त होता है।यदि सपने में अपनी डिलीवरी ,प्रेग्नेंसी देखती हूं तो बच्चों की खुशखबरी सुनती हूं, चाहे परिचितों से या रिश्तेदारों से।
समय अपनी गति से चलता रहा।नवम्बर के प्रथम सप्ताह की एक रात मैंने सपने में पुनः प्रशांत को देखा, मैंने उससे कहा कि तुम भटक क्यों रहे हो, प्रीति के यहां(उसकी जुड़वां) पैदा क्यों नहीं हो जाते।सुबह मैंने पति से जिक्र भी किया।उन्होंने कहा कि तुम सभी अभी सदमें में हो इसलिए ऐसे सपने देखते रहते हो।एक दो दिनों में मां-बहनों से बात करने पर पता चला कि उस रात्रि सभी ने सपने में उसे देखा था।20-25 दिन बाद मैंने फिर सपना देखा कि मेरे बेटा हुआ है।सुबह उठते ही मैंने पति को यह बात बताई।अभी आधे घंटे ही बीते थे कि प्रीति का फोन आया, मैंने हैलो बोलते ही कहा कि खुशखबरी सुना रही हो न,वह चौक पड़ी कि आपको कैसे पता।मैंने उसे सपने वाली बात बताई।उसने कहा कि आप सही कह रही हैं, मैंने अभी प्रेग्नेंसी टेस्ट किया है, पॉजिटिव रिपोर्ट आई है।खैर, दुःख से निकलने के लिए खुशी की एक किरण भी काफी होती है।
यथा समय उसे पुत्र की प्राप्ति हुई।हम सब उसे प्रशांत का पुनर्जन्म ही मानते हैं।प्रीति एवं छोटी बहन तो बाकायदा उसे राखी भी बांधती हैं।हालांकि मेरा मानना है कि वर्तमान के रिश्ते को ही देखना चाहिए।सब विश्वास की बातें हैं अपनी अपनी।
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